UPI पर MDR: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, केंद्र-RBI-NPCI को नोटिस; 15 अक्टूबर से लागू होनी है नई व्यवस्था

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UPI पर MDR: सुप्रीम कोर्ट ने नहीं लगाई रोक, केंद्र-RBI-NPCI को नोटिस; 15 अक्टूबर से लागू होनी है नई व्यवस्था

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को 2,000 रुपये से ज्यादा के कुछ यूपीआई पर्सन-टू-मर्चेंट भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र के फैसले पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने इस फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और यूपीआई स्टीयरिंग कमेटी को नोटिस जारी कर चार हफ्ते में जवाब मांगा है। रोक न लगने से नई व्यवस्था के 15 अक्टूबर से लागू होने का रास्ता फिलहाल खुला है।

याचिका में क्या मांग है

यह जनहित याचिका अधिवक्ता अंजन दत्ता ने दायर की है। इसमें वित्त मंत्रालय की 14 और 15 सितंबर 2026 की अधिसूचनाओं और नए MDR ढांचे को रद्द करने की मांग की गई है। (आपके दिए ब्योरे में 14 दिसंबर की तारीख लिखी थी, जबकि अन्य रिपोर्टों में सितंबर बताया गया है।) याचिकाकर्ता का आरोप है कि यह शुल्क पर्याप्त कानूनी आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लगाया गया है। सुनवाई के दौरान उनके वकील ने अंतरिम रोक की मांग करते हुए दलील दी कि इससे व्यापारी यूपीआई से दूर हो सकते हैं और नकद तथा काले धन से जुड़े लेनदेन बढ़ सकते हैं।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने रोक की मांग स्वीकार नहीं की, लेकिन प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया। रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने केंद्र से यह भी पूछा है कि यूपीआई लेनदेन पर व्यापारियों से लिया जाने वाला MDR फीस है, टैक्स है या कुछ और।

नई व्यवस्था में क्या है

केंद्र के फ्रेमवर्क के तहत मर्चेंट को किए जाने वाले 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR की मंजूरी दी गई है। 75,000 रुपये और उससे अधिक के भुगतान पर यह शुल्क अधिकतम 300 रुपये तक सीमित रहेगा। 2,000 रुपये तक के सभी लेनदेन और दो व्यक्तियों के बीच के सामान्य यूपीआई लेनदेन निशुल्क रहेंगे। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि जैसे कम मार्जिन वाले जरूरी क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ऊपर के प्रत्येक लेनदेन पर पांच रुपये का तय MDR होगा, जबकि म्यूचुअल फंड, सिक्योरिटीज और ब्रोकर-डीलर के जरिए भुगतान पर 0.02 प्रतिशत की दर लगेगी, जिसकी सीमा 300 रुपये होगी। लगभग छह साल तक यूपीआई पर ऐसे व्यापारी शुल्क नहीं लगे थे।

सरकार का पक्ष

सरकार हाल में स्पष्ट कर चुकी है कि MDR टैक्स नहीं, बल्कि फीस है, जिसे बैंकों और यूपीआई प्लेटफॉर्म्स के बीच बांटा जाएगा। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अगस्त की शुरुआत में कहा था कि यह शुल्क ग्राहकों पर नहीं, कारोबारियों पर लागू होता है और इससे मिली राशि का इस्तेमाल बैंक और फिनटेक कंपनियां ढांचे और सुरक्षा में सुधार के लिए करती हैं।

आगे क्या

चार हफ्ते की जवाब की अवधि 15 अक्टूबर के बाद खत्म होगी, यानी केंद्र और अन्य प्रतिवादियों के हलफनामे नई व्यवस्था लागू होने के बाद ही आएंगे, जब तक अदालत कोई अलग आदेश न दे। शुल्क की कानूनी प्रकृति पर अदालत का अंतिम रुख इन जवाबों और आगे की सुनवाई पर निर्भर करेगा।

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