तेलंगाना में अक्तूबर में 95% कम बारिश, टैंकरों से धान बचा रहे किसान; सूखे जैसे हालात वाले मंडलों की संख्या 315 से ज्यादा

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तेलंगाना सूखा: अक्तूबर में 95% कम बारिश, टैंकरों से सिंचाई करते किसान

तेलंगाना में अक्तूबर के पहले तीन हफ्तों में लगभग बारिश नहीं हुई है और खड़ी फसलें बचाने के लिए किसान पानी के टैंकर मंगवा रहे हैं। भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के आंकड़ों के मुताबिक, 1 से 21 अक्तूबर के बीच राज्य में औसतन सिर्फ 3.5 मिमी बारिश दर्ज हुई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 75.6 मिमी है। यह 95 प्रतिशत की कमी है। राज्य सरकार ने सूखे जैसी शुरुआती स्थिति वाले 315 मंडल चिन्हित किए हैं और प्रभावित किसानों के लिए 1,986.89 करोड़ रुपये के सहायता पैकेज का प्रस्ताव रखा है।

कितनी कम हुई बारिश?

आईएमडी के मुताबिक, 1 से 21 अक्तूबर के बीच राज्य के 12 जिलों में एक बूंद बारिश नहीं हुई। दक्षिण-पश्चिम मानसून भी 17 प्रतिशत की कमी के साथ खत्म हुआ था। राज्य में सामान्य 740.6 मिमी के मुकाबले 615.5 मिमी बारिश हुई।

तेलंगाना योजना विभाग के जून से 22 अक्तूबर तक के आंकड़ों में कमी 24 प्रतिशत बताई गई है। इसमें औसत बारिश 618.8 मिमी दर्ज हुई, जबकि सामान्य 814.5 मिमी मानी गई है। दोनों आंकड़ों में अवधि और सामान्य औसत का आधार अलग है। किसी भी जिले में सामान्य से ज्यादा बारिश दर्ज नहीं हुई।

जलाशयों में घटता पानी

सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 30 सितंबर को कृष्णा और गोदावरी बेसिन के प्रमुख और मध्यम जलाशयों में कुल 503.43 टीएमसी पानी था। पिछले साल इसी तारीख को यह 834.92 टीएमसी था, यानी करीब 40 प्रतिशत की गिरावट। 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि परियोजनाओं में भंडारण क्षमता के 20 प्रतिशत से कम रह गया है और उपलब्ध पानी 200 टीएमसी से ज्यादा नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि सूखे जैसे हालात अगले 8 से 10 महीने बने रह सकते हैं और किसानों से केवल सूखी फसलें और सब्जियां उगाने की अपील की।

टैंकरों से सिंचाई, बिजली पर भी दबाव

खेतों में नमी घटने के बीच कई किसान धान बचाने के लिए पानी के टैंकर किराए पर ले रहे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हनमकोंडा जिले के हसनपर्थी मंडल के अनंतसागर गांव के किसान श्याम सुंदर रेड्डी ने आठ एकड़ धान की फसल के लिए चार टैंकर मंगवाए हैं। सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता को लेकर भी चिंता जताई जा रही है। राज्य में बिजली की अधिकतम मांग 9 सितंबर को 19,543 मेगावाट रही, जो पिछले साल इसी दिन के 15,906 मेगावाट से 23 प्रतिशत ज्यादा थी।

सरकार का कदम

राज्य सरकार ने 315 मंडलों में सूखे जैसी शुरुआती स्थिति की पहचान की है। इनमें 101 मंडल गंभीर रूप से और 214 मंडल मध्यम रूप से प्रभावित बताए गए हैं। कम बारिश और फसल नुकसान से प्रभावित किसानों के लिए 1,986.89 करोड़ रुपये का सहायता पैकेज प्रस्तावित है।

ताजा रिपोर्टों में यह संख्या और बढ़ने के संकेत मिले हैं। एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने प्रारंभिक तौर पर 358 सूखा प्रभावित मंडल चिन्हित किए हैं, जिनमें 324 में भूजल स्तर गंभीर बताया गया है, और सूची 31 अक्तूबर तक केंद्र को भेजी जानी है। इस आंकड़े की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं मिली है।

अल नीनो की भूमिका कितनी?

आईएमडी ने इस साल अल नीनो के मजबूत होने की आशंका जताते हुए दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने का पूर्वानुमान दिया था। हालांकि, उसी पूर्वानुमान में तेलंगाना सहित दक्षिण प्रायद्वीप के उत्तरी हिस्से में सामान्य से सामान्य से ज्यादा बारिश के आसार भी बताए गए थे। अक्तूबर में बारिश की कमी के पीछे विशेषज्ञ अल नीनो समेत जलवायु परिवर्तनशीलता और ग्लोबल वार्मिंग जैसे कारकों को जिम्मेदार बताते हैं, पर आईएमडी या राज्य सरकार ने इस कमी का कारण केवल अल नीनो को नहीं बताया है।

राजनीतिक बयानबाजी

सूखे को लेकर राजनीति भी गरम है। विपक्षी भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के नेता हरीश राव और के.टी. रामा राव का आरोप है कि राज्य की कांग्रेस सरकार नदियों में उपलब्ध पानी का उपयोग नहीं कर पाई, सिंचाई परियोजनाएं निष्क्रिय पड़ी हैं और खेती के लिए बिजली आपूर्ति पर्याप्त नहीं है। हरीश राव ने सरकार से जलाशयवार जल भंडार और सूखा राहत के लिए खर्च पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है और कहा है कि अल नीनो को लेकर पहले से मिली चेतावनियों पर कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने फसल मुआवजा और दिहाड़ी मजदूरों को राहत की भी मांग की है।

सरकार का पक्ष है कि हालात मौसमी कमी और जलाशयों में घटते पानी से पैदा हुए हैं। बीआरएस के आरोपों पर सरकार का विस्तृत जवाब हमारे संज्ञान में नहीं आया है।

आगे क्या?

सूखा प्रभावित मंडलों की अंतिम सूची और केंद्र को भेजे जाने वाले प्रस्ताव पर सबकी नजर रहेगी। साथ ही यह भी देखना होगा कि 1,986.89 करोड़ रुपये का पैकेज किन किसानों को, किस रूप में और कब तक मिलता है।

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