तुम्मिडिहट्टी बैराज पर रेवंत रेड्डी और फडणवीस की मुंबई में बैठक: 152 मीटर पर विचार को महाराष्ट्र तैयार, पर शर्त के साथ

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तुम्मिडिहट्टी बैराज: रेवंत रेड्डी-फडणवीस बैठक, 152 मीटर पर महाराष्ट्र तैयार

गोदावरी की सहायक प्राणहिता नदी पर प्रस्तावित तुम्मिडिहट्टी बैराज की ऊंचाई को लेकर तेलंगाना और महाराष्ट्र के बीच जमी बर्फ पिघलती दिख रही है। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोमवार, 26 अक्तूबर को मुंबई में इस मुद्दे पर बातचीत की। तेलंगाना सरकार के बयान के मुताबिक, महाराष्ट्र बैराज की ऊंचाई 148 मीटर से बढ़ाकर 152 मीटर करने के प्रस्ताव पर विचार करने को तैयार है, बशर्ते इससे वहां के लोगों पर असर न पड़े।

मुंबई में क्या हुआ?

बैठक में तेलंगाना के सिंचाई मंत्री एन. उत्तम कुमार रेड्डी, दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ सिंचाई अधिकारी मौजूद रहे। तेलंगाना की ओर से बताया गया कि 148 मीटर की जगह 152 मीटर ऊंचाई होने पर सिंचाई और पेयजल की जरूरतें पूरी हो सकेंगी और महाराष्ट्र के प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिया जाएगा।

रेवंत रेड्डी ने इसे दोनों राज्यों के लिए फायदेमंद परियोजना बताया, खासकर सीमा से लगे आदिवासी इलाकों के विकास के लिहाज से। उन्होंने फडणवीस को दिसंबर में हैदराबाद में होने वाले ‘इन्वेस्ट तेलंगाना ग्लोबल समिट’ में आने का न्योता भी दिया।

बताया गया है कि फडणवीस ने बैराज की ऊंचाई पर नए सिरे से विचार के अनुरोध पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि तकनीकी, पर्यावरणीय और प्रशासनिक पहलुओं की जांच के बाद ही अंतिम फैसला होगा, ताकि महाराष्ट्र के हित सुरक्षित रहें। रिपोर्टों के मुताबिक, डूब क्षेत्र, प्रभावित खेत और पुनर्वास की जांच के लिए दोनों राज्यों के अधिकारियों की संयुक्त समिति का प्रस्ताव भी सामने आया है। इस बैठक की ज्यादातर जानकारी तेलंगाना सरकार के बयान से मिली है। महाराष्ट्र सरकार की ओर से अलग से जारी बयान हमारी जानकारी में नहीं आया है।

तेलंगाना क्यों चाहता है ज्यादा ऊंचाई?

तेलंगाना के अनुसार, तुम्मिडिहट्टी बैराज अविभाजित आदिलाबाद जिले की करीब 2 लाख एकड़ जमीन को सिंचाई सुविधा देने के लिए जरूरी है। यह जिला आदिवासी आबादी और वन क्षेत्र वाला है और विकास के लिहाज से पिछड़ा माना जाता है। रेवंत रेड्डी का कहना है कि 148 मीटर पर जरूरी मात्रा में पानी का मोड़ संभव नहीं होगा।

राज्य के अधिकारियों का तर्क है कि 152 मीटर पर पानी गुरुत्वाकर्षण से येल्लमपल्ली और सुंदिल्ला की ओर बहाया जा सकेगा। इससे बड़े पंपों और बिजली पर निर्भरता घटेगी। तेलंगाना का अनुमान है कि इस स्तर पर सालाना पानी की निकासी करीब 43 टीएमसी से बढ़कर 80 टीएमसी तक पहुंच सकती है। ये राज्य सरकार के अनुमान हैं और अभी अंतिम रूप से सत्यापित नहीं हैं।

डूब क्षेत्र पर क्या हैं आंकड़े?

तेलंगाना के अधिकारियों ने महाराष्ट्र में संभावित डूब का आकलन पेश किया है। 23 अक्तूबर की समीक्षा बैठक में बताया गया कि 152 मीटर ऊंचाई पर करीब 2,300 एकड़ जमीन प्रभावित हो सकती है। सितंबर में दिल्ली की बैठक में केंद्रीय जल एवं विद्युत अनुसंधान केंद्र (सीडब्ल्यूपीआरएस) के अध्ययनों के हवाले से 148 मीटर पर 1,150 एकड़ से अधिक और 152 मीटर पर करीब 2,500 एकड़ डूब का अनुमान रखा गया था। दोनों बैठकों के आंकड़ों में अंतर है, इसलिए अंतिम स्थिति संयुक्त जांच के बाद ही साफ होगी। तेलंगाना ने यह भी दावा किया है कि महाराष्ट्र के गांवों को बड़ा डूब खतरा नहीं है और अतिरिक्त डूब को कम किया जा सकता है। महाराष्ट्र की ओर से इन आंकड़ों पर टिप्पणी अभी सामने नहीं आई है।

कैसे पहुंचा मामला यहां तक?

2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री फडणवीस और तत्कालीन तेलंगाना मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव के बीच हुए अंतर-राज्यीय समझौते में तुम्मिडिहट्टी बैराज के लिए 148 मीटर स्तर पर सहमति बनी थी। उस समय योजना से करीब 2 लाख एकड़ जमीन की सिंचाई का लक्ष्य था। बाद में तेलंगाना ने परियोजना को कालेश्वरम लिफ्ट सिंचाई योजना के रूप में नया रूप दिया और तुम्मिडिहट्टी का काम आगे नहीं बढ़ा।

मौजूदा कांग्रेस सरकार ने इस साल इस मुद्दे को फिर उठाया। रेवंत रेड्डी ने 27 मई को फडणवीस को पत्र लिखकर बैराज की ऊंचाई पर बातचीत की मांग की। जून में उन्होंने फडणवीस पर बैठक टालने का आरोप लगाया, लेकिन कुछ ही दिनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर केंद्र से मध्यस्थता मांगी। 1 सितंबर को केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में दिल्ली में दोनों राज्यों के अधिकारियों की बैठक हुई, जिसमें तेलंगाना को महाराष्ट्र से कोई आश्वासन नहीं मिला। तेलंगाना ने तब कहा था कि अगर 152 मीटर पर सहमति न बने तो कम से कम 150 मीटर का स्तर मिलना चाहिए। 23 अक्तूबर को रेवंत रेड्डी ने अधिकारियों को बैठक की तैयारी का निर्देश दिया था, जिसके बाद 26 अक्तूबर को मुंबई में बातचीत हुई।

इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि बातचीत की पहल महाराष्ट्र की ओर से हुई। तेलंगाना लंबे समय से बैठक की मांग करता रहा है और फडणवीस ने अब बातचीत और जांच पर सहमति दी है।

आगे क्या?

फिलहाल कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है। तेलंगाना को अब डूब क्षेत्र, पानी की उपलब्धता और मुआवजे से जुड़ी विस्तृत रिपोर्ट के साथ महाराष्ट्र को 152 मीटर के लिए मनाना है। उसके बाद पानी के मार्ग और भूमि अधिग्रहण का काम तेज होगा। अंतिम फैसला दोनों राज्यों की सहमति और केंद्रीय जल आयोग की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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