दीपोत्सव के 10वें संस्करण से पहले योगी का संदेश: 2017 के बाद अयोध्या में विकास का नया सूर्योदय

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अयोध्या दीपोत्सव 2026: 10वें संस्करण से पहले योगी का संदेश

अयोध्या में आयोजित होने वाले 10वें दीपोत्सव से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसे अयोध्या के प्राचीन वैभव और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा संदेश में उन्होंने कहा कि सप्तपुरियों में श्रेष्ठ श्रीअयोध्या धाम इस आयोजन के स्वागत के लिए उत्साहित है। साथ ही उन्होंने वर्ष 2017 से पहले की स्थिति को लेकर पूर्ववर्ती सरकार पर निशाना साधा।

सरयू तट पर क्या होगा

मुख्यमंत्री के अनुसार, दीपोत्सव के दौरान सरयू तट लाखों दीपों की आभा से जगमगाएगा। रामायण के प्रसंगों पर आधारित झांकियां, शोभायात्राएं और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां भी आयोजन का हिस्सा होंगी। उन्होंने कहा कि हर दीप प्रभु श्रीराम के प्रति श्रद्धा का प्रतीक होगा।

2017 की शुरुआत और इस बार की तैयारी

मुख्यमंत्री ने बताया कि दीपोत्सव की यात्रा वर्ष 2017 में 1.71 लाख दीपों के साथ शुरू हुई थी। अब यह देश-दुनिया के रामभक्तों की आस्था का प्रतीक बन चुका है। उनके मुताबिक इस वर्ष भी दीप प्रज्ज्वलन का विश्व कीर्तिमान बनाने की तैयारी है। दीयों की संख्या और आयोजन की तारीख को लेकर उनके संदेश में कोई आंकड़ा नहीं दिया गया है।

पूर्ववर्ती सरकार पर आरोप

योगी आदित्यनाथ ने दावा किया कि 2017 से पहले अयोध्या उपेक्षा, अव्यवस्था और बदहाली से जूझ रही थी। उन्होंने रामभक्तों पर गोली चलवाने और हनुमानगढ़ी की सीढ़ियों पर नमाज पढ़वाने का उल्लेख करते हुए कहा कि तत्कालीन सरकार को रामनगरी के विकास से कोई मतलब नहीं था। ये मुख्यमंत्री के राजनीतिक आरोप हैं। इस रिपोर्ट में पूर्ववर्ती सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया शामिल नहीं है।

विकास कार्यों का जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में डबल इंजन सरकार के प्रयासों से अयोध्या अपना प्राचीन वैभव फिर पा रही है। उन्होंने इन कार्यों का उल्लेख किया:

  • श्रीराम मंदिर
  • महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा
  • रामपथ
  • नवनिर्मित घाट

उनके अनुसार, सोलर सिटी के रूप में विकसित हो रही अयोध्या आस्था और आधुनिकता के संगम के रूप में उभर रही है।

पीढ़ियों के सपने से जोड़ा

योगी ने दीपोत्सव को उन पीढ़ियों की आकांक्षा से जोड़ा, जिन्होंने अयोध्या को उसके त्रेतायुगीन स्वरूप में देखने का सपना संजोया था। उन्होंने इसे सांस्कृतिक स्वाभिमान, आस्था और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक बताया।

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