आगरा के कमला नगर थाने के हिस्ट्रीशीटर मनोज अग्रवाल की फेसबुक प्रोफाइल पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और अन्य नेताओं के साथ उसकी तस्वीरें सोमवार को सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। लोगों ने तस्वीरों के फर्जी होने का संदेह जताया, जिसके बाद मनोज ने माफी मांगते हुए दावा किया कि उसका फेसबुक अकाउंट हैक हो गया था और एआई से बनी नकली तस्वीरें पोस्ट की गईं। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास के अनुसार मामले की जांच साइबर सेल से कराई जा रही है।
क्या हुआ
मनोज अग्रवाल की फेसबुक प्रोफाइल पर जो तस्वीरें दिखीं, उनमें वह प्रधानमंत्री मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री जयवीर सिंह और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समेत कई नेताओं के साथ नजर आ रहा था। तस्वीरों के वायरल होते ही लोगों ने सोशल मीडिया पर टिप्पणियां शुरू कर दीं। कई यूजर्स ने आरोप लगाया कि हिस्ट्रीशीटर ने तस्वीरें फर्जी तरीके से तैयार कर पोस्ट की हैं। इसे लेकर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी पोस्ट किए गए।
मनोज अग्रवाल का स्पष्टीकरण
आलोचना बढ़ने पर मनोज की ओर से माफी और स्पष्टीकरण पोस्ट किया गया। उसमें लिखा गया कि किसी ने उसका फेसबुक अकाउंट हैक कर लिया था और इसकी उसे जानकारी नहीं थी। मनोज के अनुसार हैकर ने एआई से बनाई गई नकली तस्वीरें पोस्ट कीं। उसका कहना है कि जानकारी मिलने पर उसने तुरंत अकाउंट का एक्सेस दोबारा हासिल किया, सभी तस्वीरें और पोस्ट हटा दीं और इसके लिए माफी भी मांगी।
यह मनोज अग्रवाल का दावा है। अकाउंट वाकई हैक हुआ था या नहीं, और तस्वीरें किसने और कैसे बनाईं या डालीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।
पुलिस की कार्रवाई
मामला सामने आने पर कमला नगर थाना पुलिस सक्रिय हो गई। डीसीपी सिटी सय्यद अली अब्बास ने बताया कि मामले की जांच साइबर सेल से कराई जा रही है। पुलिस के अनुसार मनोज अग्रवाल के खिलाफ 9 मामले दर्ज हैं।
पहले भी चर्चा में आ चुका है नाम
अगस्त 2024 में भी मनोज अग्रवाल आगरा जिला जेल में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम में अतिथि के रूप में पहुंचने पर चर्चा में आया था। तब सोशल मीडिया पर फोटो वायरल होने के बाद जेल अधिकारियों की ओर से कहा गया था कि उसके हिस्ट्रीशीटर होने की जानकारी नहीं थी। उस समय की रिपोर्टों में यह भी बताया गया था कि उसकी कुछ स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पुलिस अधिकारियों के साथ तस्वीरें उसके सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा थीं। किसी फोटो में किसी के साथ दिखने का मतलब उसके साथ किसी संबंध का प्रमाण नहीं है।
अब आगे क्या
साइबर सेल की जांच में यह देखा जाएगा कि अकाउंट से तस्वीरें कैसे और किसने अपलोड कीं, क्या अकाउंट हैक हुआ था और तस्वीरें असली हैं या एआई या एडिटिंग से तैयार की गई हैं। जांच पूरी होने तक मनोज अग्रवाल के दावे को अंतिम सच नहीं माना जा सकता।

