आगरा मेट्रो के कॉरिडोर-2 की डिपो लाइन पर ट्रायल से पहले होने वाली स्ट्रक्चर गेज मूवमेंट की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसमें यह जांचा जा रहा है कि नई बनी संरचनाओं के बीच मेट्रो ट्रेन, ट्रैक और जरूरी उपकरणों के सुरक्षित गुजरने के लिए निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त जगह है या नहीं। यह काम उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (यूपीएमआरसी) के अधिकारियों और निर्माण टीम की मौजूदगी में शुरू किया गया।
क्या है स्ट्रक्चर गेज मूवमेंट
यूपीएमआरसी के संयुक्त महाप्रबंधक पंचानन मिश्र के अनुसार नव निर्मित मेट्रो संरचनाओं में इस प्रक्रिया के दौरान देखा जाता है कि तय मानकों के मुताबिक ट्रेन और आवश्यक उपकरण सुरक्षित तरीके से गुजर सकते हैं या नहीं। आमतौर पर मेट्रो परियोजनाओं में ट्रेन चलाने से पहले यह जांच इसलिए जरूरी मानी जाती है कि पटरी के आसपास की संरचनाएं, प्लेटफॉर्म, शेड और अन्य निर्माण ट्रेन के निर्धारित दायरे से टकराव की स्थिति में न हों। आगरा में यह जांच किस उपकरण और किस तरीके से की जा रही है, इसका ब्योरा अभी सामने नहीं आया है।
फिलहाल यह कार्य कॉरिडोर-2 की डिपो लाइन पर शुरू हुआ है। मुख्य मार्ग पर ट्रायल से पहले इसी तरह की जांच कब होगी और ट्रायल की तारीख क्या होगी, इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कॉरिडोर-2 क्या है
आगरा मेट्रो का कॉरिडोर-2 आगरा कैंट से कालिंदी विहार तक प्रस्तावित एलिवेटेड मार्ग है। पूर्व में आई यूपीएमआरसी की योजना के अनुसार यह करीब 15 किलोमीटर लंबा है और इसमें 14 स्टेशन बनाए जाने हैं। यह मार्ग एमजी रोड से होकर हाईवे की ओर जाता है और इसमें यमुना नदी पर पुल भी बनाया जा रहा है। यह कॉरिडोर आगरा कॉलेज स्टेशन पर पहले कॉरिडोर से जुड़ेगा, जहां यात्रियों को इंटरचेंज की सुविधा मिलने की योजना है। निर्माण की समय-सीमा समय-समय पर बदलती रही है, इसलिए चालू होने की तारीख फिलहाल घोषित नहीं है।
शहरवासियों को क्या मिलेगा
मेट्रो सेवा शुरू होने पर आगरा के लोगों को सड़क के भारी यातायात के बीच तेज और सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन का विकल्प मिलेगा। यूपीएमआरसी के अनुसार इससे सुरक्षित और पर्यावरण के अनुकूल सफर की सुविधा भी उपलब्ध होगी।
अब आगे क्या
डिपो लाइन पर यह जांच पूरी होने के बाद ट्रायल की तैयारियां आगे बढ़ेंगी। आगे की प्रक्रिया और ट्रायल की तारीख पर यूपीएमआरसी की ओर से घोषणा का इंतजार है।

