भाजपा ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा चुनाव के लिए जिन आठ नामों की सूची जारी की है, उनमें आगरा के राम प्रताप सिंह चौहान समेत ब्रज क्षेत्र के तीन नेता शामिल हैं। इनमें दो नाम बरेली से हैं, पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार की बेटी श्रुति गंगवार और आंवला के विधायक व प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह। इन तीनों के उच्च सदन पहुंचने पर ब्रज क्षेत्र में सांसदों की संख्या 8 से बढ़कर 11 होने का आकलन है और आगरा में भाजपा के सांसद पांच हो जाएंगे। राजनीतिक गलियारों में इसे लोधी, कुर्मी और क्षत्रिय मतदाताओं को साधने की भाजपा की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
सूची में कौन-कौन
भाजपा की सूची में धर्मपाल सिंह, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय, राम प्रताप सिंह चौहान, प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार के नाम हैं। इनमें ब्रज क्षेत्र से जुड़े तीन चेहरे राम प्रताप, श्रुति और धर्मपाल हैं।
आगरा से राम प्रताप
राम प्रताप सिंह चौहान आगरा की एत्मादपुर सीट से पूर्व विधायक हैं और फिलहाल भाजपा के प्रदेश महामंत्री के रूप में संगठन की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे ठाकुर समुदाय से आते हैं। यूजीसी से जुड़े मुद्दे को लेकर आगरा और आसपास के क्षेत्र में ठाकुर समाज की नाराजगी की चर्चा रही है। बताया जा रहा है कि हाल में इस मुद्दे पर सबसे उग्र प्रदर्शन एत्मादपुर की उसी बाइसी से हुआ, जहां की सियासत में राम प्रताप का प्रभाव माना जाता है। इसी पृष्ठभूमि में उनके चयन को क्षत्रिय मतदाताओं को संदेश देने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
कुर्मी वोट बैंक पर श्रुति का दांव
श्रुति गंगवार बरेली के वरिष्ठ भाजपा नेता और झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार की बेटी हैं। संतोष गंगवार बरेली से आठ बार सांसद रहे हैं और भाजपा के बड़े कुर्मी चेहरों में गिने जाते हैं। वर्ष 2024 में लोकसभा का टिकट कटने के बाद उन्हें झारखंड का राज्यपाल बनाया गया था। श्रुति के राज्यसभा जाने से कुर्मी मतदाताओं में पार्टी के प्रति भरोसा बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।
लोधी समाज को साधने की रणनीति
धर्मपाल सिंह आंवला से भाजपा विधायक हैं और प्रदेश सरकार में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के कैबिनेट मंत्री हैं। उन्हें लोधी समाज के प्रमुख नेताओं में गिना जाता है। पार्टी ने केंद्रीय राज्यमंत्री बीएल वर्मा को इस बार राज्यसभा का टिकट नहीं दिया और उनकी जगह धर्मपाल सिंह को प्रत्याशी बनाया। लोधी मतदाताओं को साथ बनाए रखने की रणनीति के तहत ही पूरन लाल लोधी को ब्रज क्षेत्र का अध्यक्ष बनाया गया है, और अब धर्मपाल सिंह का नाम भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है।
पीडीए के जवाब में पुराने वोट बैंक पर जोर
सूची से संकेत मिलता है कि भाजपा समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की काट के लिए अपने परंपरागत वोट बैंक को मजबूत करने पर जोर दे रही है। इसी मकसद से ब्रज में लोधी, कुर्मी और क्षत्रिय मतदाताओं को जोड़े रखने के लिए पार्टी ने भरोसेमंद नेताओं को नई जिम्मेदारी सौंपी है। यह आकलन राजनीतिक विश्लेषण पर आधारित है, भाजपा की ओर से इस आशय का कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
आगे क्या
धर्मपाल सिंह के राज्यसभा जाने की स्थिति में आंवला विधानसभा सीट पर भाजपा को नए चेहरे की तलाश करनी होगी। साथ ही देखना होगा कि राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ब्रज क्षेत्र में पार्टी का यह जातीय समीकरण जमीन पर कितना असर दिखाता है।

