यूपी: ‘आपके पति ने लिया है लोन, घर पहुंच रही पुलिस…’ साइबर ठगों का नया जाल, APK फाइल खोलते ही खाते से उड़ रहे पैसे

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आगरा साइबर ठगी: पति के फर्जी लोन का डर दिखाकर महिलाओं को बना रहे शिकार

आगरा में साइबर ठगों ने लोगों को ठगने के लिए नया तरीका अपनाया है। इस बार उनके निशाने पर महिलाएं हैं। ठग फोन करके महिलाओं को उनके पति के नाम पर फर्जी ऑनलाइन लोन बकाया होने की जानकारी देते हैं और रकम जमा नहीं करने पर घर पुलिस भेजने की धमकी देते हैं। इसके बाद मोबाइल पर APK फाइल भेजकर उसे खोलने के लिए कहा जाता है। डर और जल्दबाजी में उठाया गया एक गलत कदम बैंक खाते से हजारों रुपये गायब कर सकता है।

ताजा मामला आगरा के न्यू आगरा थाना क्षेत्र का है। यहां एक अधिवक्ता की पत्नी को अनजान नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने उनके पति का नाम और मोबाइल नंबर बताते हुए दावा किया कि उन्होंने 62 हजार रुपये का ऑनलाइन लोन लिया है, जिसका भुगतान नहीं किया गया है। इसके बाद महिला को जल्द ही घर पर पुलिस पहुंचने की धमकी दी गई।

ठग ने महिला को डराने के बाद मोबाइल पर एक APK फाइल भेजी और उसे खोलने के लिए कहा। इसी दौरान अधिवक्ता पति घर लौट आए। उन्होंने फोन पर हो रही बातचीत को समझते हुए तत्काल कॉल कटवा दी और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराई। समय रहते सतर्कता बरतने से संभावित आर्थिक नुकसान टल गया।

30 हजार के फर्जी लोन का डर दिखाकर खाते से निकाले 4,250 रुपये

आगरा के छीपीटोला निवासी प्रियंका के साथ इसी तरह की ठगी हुई। साइबर अपराधियों ने उनके सेल्समैन पति के नाम पर 30 हजार रुपये का ऑनलाइन लोन बकाया होने की बात कही। कॉल करने वालों ने रिकवरी और पुलिस कार्रवाई का डर दिखाकर महिला पर दबाव बनाया।

घबराहट में प्रियंका ने मोबाइल पर भेजी गई APK फाइल खोल दी। इसके बाद उनके बैंक खाते से 4,250 रुपये कट गए। इस घटना में ठगों ने परिवार के सदस्य के नाम और कथित कर्ज की जानकारी का इस्तेमाल करके महिला को अपने जाल में फंसाया।

दोनों मामलों से साफ है कि साइबर अपराधी अब केवल बैंक या KYC अपडेट के नाम पर ही नहीं, बल्कि परिवार के सदस्यों को कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर भी लोगों को निशाना बना रहे हैं।

डीसीपी साइबर क्राइम ने दी चेतावनी

डीसीपी साइबर क्राइम आदित्य सिंह ने बताया कि साइबर अपराधी लोगों के निजी डेटा का गलत इस्तेमाल कर ठगी के नए-नए तरीके अपना रहे हैं। उनके पास लोगों के नाम, मोबाइल नंबर और परिवार से जुड़ी जानकारियां हो सकती हैं, जिनके आधार पर वे खुद को भरोसेमंद दिखाने की कोशिश करते हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस फोन पर गिरफ्तारी या रिकवरी के नाम पर पैसे जमा करने का दबाव नहीं बनाती। ऐसे किसी भी फोन कॉल से घबराने के बजाय उसकी सत्यता की जांच करनी चाहिए।

APK फाइल के जरिए कैसे हो सकती है ठगी?

APK एंड्रॉयड मोबाइल में एप्लिकेशन इंस्टॉल करने वाली फाइल होती है। साइबर अपराधी इसी माध्यम से संदिग्ध और दुर्भावनापूर्ण एप फोन में इंस्टॉल करवाने की कोशिश कर सकते हैं।

ऐसे एप को जरूरी अनुमतियां मिल जाने पर मोबाइल में मौजूद संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाई जा सकती है। बैंकिंग से जुड़ी जानकारी और अन्य निजी डेटा का दुरुपयोग करके अनधिकृत लेनदेन किए जाने का खतरा रहता है।

सरकारी साइबर सुरक्षा दिशा-निर्देशों में भी अनजान स्रोतों से APK डाउनलोड नहीं करने और एप इंस्टॉल करते समय उसकी अनुमतियों की जांच करने की सलाह दी गई है।

साइबर ठगी से बचने के लिए इन बातों का रखें ध्यान

1. पुलिस की धमकी से न घबराएं: कोई अनजान व्यक्ति पति या परिवार के सदस्य पर लोन बकाया होने और गिरफ्तारी की धमकी दे तो तुरंत उसकी बातों पर भरोसा न करें।

2. लोन की जानकारी सत्यापित करें: संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था से सीधे संपर्क करके पता करें कि वास्तव में कोई लोन बकाया है या नहीं।

3. अनजान APK फाइल न खोलें: WhatsApp, SMS या किसी अन्य माध्यम से आई संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।

4. OTP और बैंक डिटेल साझा न करें: किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, बैंक खाते की जानकारी या अन्य गोपनीय विवरण न बताएं।

5. अनजान एप को अनुमति न दें: किसी के कहने पर मोबाइल में एप डाउनलोड न करें और बिना जरूरत किसी एप को संवेदनशील अनुमतियां न दें।

6. ठगी होने पर तुरंत शिकायत करें: यदि खाते से पैसे कट गए हैं तो बिना देरी किए 1930 पर कॉल करें। राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल के माध्यम से भी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

याद रखें: साइबर ठग पहले डर पैदा करते हैं, फिर जल्दबाजी में फैसला करवाते हैं। इसलिए किसी भी अनजान कॉल पर घबराकर कोई फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें।

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