आगरा में भारी वाहनों की आवाजाही पर लगाम लगाने के लिए करीब 400 करोड़ रुपये की लागत से उत्तरी बाईपास बनाया गया, लेकिन इसके बावजूद शहर के बीच से ट्रकों और अन्य भारी वाहनों का गुजरना जारी है। इसका खामियाजा आम लोगों को अपनी जान देकर भुगतना पड़ रहा है। बृहस्पतिवार को आगरा-मथुरा हाईवे (एनएच-19) के वाटरवर्क्स फ्लाईओवर पर ट्रक की टक्कर से टूंडला निवासी 35 वर्षीय जीशान की मौत हो गई। इस ताजा हादसे के बाद एक बार फिर यातायात व्यवस्था और जिम्मेदार विभागों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2026 में अब तक आगरा की सीमा में हाईवे पर 110 लोगों की जान जा चुकी है।
400 करोड़ का बाईपास, फिर भी शहर के अंदर से गुजर रहे भारी वाहन
आगरा में भारी वाहनों के दबाव को कम करने और शहर के व्यस्त इलाकों को राहत देने के उद्देश्य से उत्तरी बाईपास का निर्माण कराया गया था। करीब 14 किलोमीटर लंबा यह बाईपास 4 दिसंबर 2025 से यातायात के लिए चालू है। इसके जरिए भारी वाहन शहर के घनी आबादी वाले हिस्सों में प्रवेश किए बिना वैकल्पिक मार्ग से निकल सकते हैं।
इसके बावजूद बड़ी संख्या में ट्रक, कंटेनर और अन्य भारी वाहन एनएच-19 के शहरी हिस्से से होकर गुजर रहे हैं। इससे भगवान टॉकीज, वाटरवर्क्स, रामबाग, सिकंदरा और आसपास की कॉलोनियों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है।
टोल बचाने के चक्कर में शहर की सड़कों पर बढ़ रहा दबाव
भारी वाहनों के बाईपास का इस्तेमाल नहीं करने के पीछे टोल और दूरी का अंतर भी एक प्रमुख वजह बताया जा रहा है। उत्तरी बाईपास के रास्ते यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ने पर वाहनों को टोल चुकाना पड़ता है, जबकि शहर के बीच से गुजरने पर यह खर्च बच जाता है।
उपलब्ध यातायात संबंधी आंकड़ों के अनुसार, उत्तरी बाईपास के कट से एक घंटे में लगभग 55 से 60 ट्रक गुजरते हैं, लेकिन इनमें से केवल 10 से 12 ट्रक ही बाईपास की ओर मुड़ते हैं। बाकी भारी वाहन आगरा शहर की तरफ प्रवेश कर जाते हैं।
इससे स्पष्ट है कि वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध होने के बावजूद भारी वाहनों का शहरी हाईवे पर दबाव कम नहीं हो पा रहा है।
110 मौतें और 27 ब्लैक स्पॉट, फिर भी नहीं थम रहे हादसे
आगरा-दिल्ली हाईवे पर सड़क दुर्घटनाओं की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। वर्ष 2026 में 6 नवंबर तक हाईवे पर 110 लोगों की मौत का आंकड़ा सामने आया है। इससे पहले सामने आए दस महीने के आंकड़ों में 109 मौतें दर्ज थीं।
हाईवे पर 27 दुर्घटना संभावित स्थान यानी ब्लैक स्पॉट भी चिह्नित किए गए हैं। इसके बावजूद तेज रफ्तार भारी वाहनों और शहरी यातायात के बीच टकराव का खतरा बना हुआ है।
आबादी वाले क्षेत्रों में स्कूल, अस्पताल, बाजार और आवासीय कॉलोनियां होने के कारण यहां से गुजरने वाले भारी वाहनों की आवाजाही विशेष रूप से संवेदनशील है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा मामला, अधिकारियों को नोटिस
आगरा में भारी वाहनों के शहर के बीच से गुजरने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस संबंध में जनहित याचिका दाखिल करने वाले वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने मांग उठाई है कि जिन व्यावसायिक वाहनों का आगरा में कोई स्थानीय गंतव्य नहीं है, उन्हें शहर के अंदर एनएच-19 से गुजरने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अक्टूबर 2026 में केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यीडा) को नोटिस जारी किया था। मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर 2026 निर्धारित की गई है।
याचिका में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 115 के तहत भारी व्यावसायिक वाहनों की आवाजाही नियंत्रित करने की मांग भी उठाई गई है।
अधिवक्ता केसी जैन बोले- हादसे के लिए सिस्टम भी जिम्मेदार
शहर से भारी वाहनों की आवाजाही के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता केसी जैन ने मौजूदा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
उनका कहना है कि वाटरवर्क्स फ्लाईओवर पर हुई मौत के लिए केवल ट्रक चालक को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है। यदि जिला प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई और परिवहन विभाग मिलकर प्रभावी रणनीति बनाते और गैर-स्थानीय भारी वाहनों को उत्तरी बाईपास से गुजरने के लिए बाध्य करते, तो इस तरह के हादसों का खतरा कम किया जा सकता था।
अब प्रशासन के सामने क्या है चुनौती?
उत्तरी बाईपास के निर्माण के बावजूद उसका अपेक्षित उपयोग सुनिश्चित नहीं हो पाना प्रशासनिक और यातायात प्रबंधन से जुड़ा बड़ा सवाल है। शहर में भारी वाहनों का प्रवेश नियंत्रित करने के लिए स्पष्ट रूट डायवर्जन, निगरानी, नियमित चेकिंग और नियमों का प्रभावी पालन जरूरी है।
वाटरवर्क्स फ्लाईओवर पर जीशान की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर शहरवासियों को भारी वाहनों के इस दबाव से कब राहत मिलेगी। अब सबकी नजरें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट में 25 नवंबर को होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं।

