महाराष्ट्र की सियासत में NCP विलय की हलचल तेज, तटकरे-प्रफुल्ल पटेल गुट मर्जर के पक्ष में; सुनेत्रा और पार्थ पवार का विरोध!

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महाराष्ट्र NCP विलय: सुनील तटकरे-प्रफुल्ल पटेल गुट मर्जर के पक्ष में, सुनेत्रा पवार का विरोध

महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुटों के संभावित विलय को लेकर सियासी हलचल तेज होती दिख रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेताओं सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल के नेतृत्व वाला एक धड़ा दोनों NCP गुटों को फिर से एक करने के पक्ष में बताया जा रहा है। वहीं, सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार इस प्रस्ताव के विरोध में हैं। इस बीच भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से भी दोनों गुटों के एक साथ आकर NDA में बने रहने की इच्छा की चर्चा है।

इस सियासी चर्चा को उस समय और हवा मिली, जब प्रफुल्ल पटेल गुरुवार शाम मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती शरद पवार से मिलने पहुंचे। इस मुलाकात को शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन राजनीतिक हलकों में दोनों नेताओं के बीच NCP के संभावित विलय और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शरद पवार को दिए गए संदेश पर बातचीत होने की अटकलें लगाई जा रही हैं।

अमित शाह से मुलाकात के बाद बढ़ी विलय की चर्चा

NCP में अंदरूनी मतभेदों की चर्चा के बीच पार्टी के कई वरिष्ठ नेताओं ने हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से दिल्ली में मुलाकात की थी। इस प्रतिनिधिमंडल में प्रफुल्ल पटेल, सुनील तटकरे, छगन भुजबल, हसन मुश्रीफ, दिलीप वळसे पाटिल और धनंजय मुंडे जैसे नेता शामिल थे। बैठक में पार्टी के भविष्य, संगठन के भीतर तालमेल और दोनों NCP गुटों के संभावित विलय का मुद्दा उठने की बात सामने आई।

सूत्रों के मुताबिक, इस धड़े की इच्छा है कि दोनों गुट एक साथ आएं और एकजुट NCP NDA का हिस्सा बनी रहे। हालांकि, पार्टी की ओर से विलय पर कोई आधिकारिक फैसला घोषित नहीं किया गया है। सुनील तटकरे पहले सार्वजनिक रूप से विलय की चर्चा को खारिज कर चुके हैं। ऐसे में पार्टी के भीतर इस मुद्दे पर एक राय होना अभी स्पष्ट नहीं है।

सुनेत्रा और पार्थ पवार क्यों कर रहे हैं विरोध?

विलय की राह में सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व और राजनीतिक नियंत्रण को लेकर बताई जा रही है। सुनेत्रा पवार और पार्थ पवार के विरोध की वजह यह मानी जा रही है कि विलय होने की स्थिति में पार्टी के भीतर उनका मौजूदा प्रभाव और नेतृत्व की भूमिका प्रभावित हो सकती है।

दूसरी ओर, वरिष्ठ नेताओं का एक वर्ग संगठन में अनुभव और वरिष्ठता को अधिक महत्व देने की मांग कर रहा है। अमित शाह से मुलाकात में सुनेत्रा और पार्थ की गैरमौजूदगी ने भी पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलों को तेज किया है। हालांकि, NCP की ओर से इन चर्चाओं को लेकर अलग-अलग समय पर सार्वजनिक रूप से सफाई भी दी गई है।

BJP को क्या फायदा हो सकता है?

राजनीतिक विश्लेषण के लिहाज से दोनों NCP गुटों का एक साथ आना BJP और NDA के लिए महाराष्ट्र में राजनीतिक समीकरण मजबूत करने का अवसर बन सकता है। शरद पवार का राज्य की राजनीति में लंबा अनुभव और प्रभाव रहा है। ऐसे में उनका गुट NDA के साथ आता है तो विपक्षी खेमे के समीकरणों पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, शरद पवार गुट के सभी सांसदों या नेताओं के NDA में शामिल होने की बात अभी महज अटकल है। इसी तरह, विलय के बदले किसी खास नेता को केंद्रीय मंत्रिमंडल या महाराष्ट्र सरकार में पद देने की चर्चा की भी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

शरद पवार गुट को क्या मिल सकता है?

यदि दोनों गुटों के बीच कभी समझौता होता है तो नेतृत्व, संगठन में जिम्मेदारियों और सत्ता में हिस्सेदारी जैसे मुद्दे सबसे अहम होंगे। सुप्रिया सुले और शरद पवार गुट के अन्य वरिष्ठ नेताओं की भूमिका को लेकर भी बातचीत हो सकती है।

लेकिन सुप्रिया सुले को केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री पद या जयंत पाटिल को महाराष्ट्र में वित्त मंत्रालय दिए जाने जैसी चर्चाओं को फिलहाल संभावित राजनीतिक समीकरण के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी भी पद या जिम्मेदारी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

शरद पवार ब्रीच कैंडी अस्पताल में क्यों भर्ती हैं?

85 वर्षीय शरद पवार को पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक से छुट्टी मिलने के कुछ ही घंटों बाद मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उन्हें खांसी और सांस से जुड़ा संक्रमण होने के बाद आगे की जांच और उपचार के लिए अस्पताल में रखा गया।

अस्पताल के डॉक्टरों ने बताया कि उन्हें ब्रोंकाइटिस जैसे लक्षणों वाला श्वसन संक्रमण है। उनका इलाज चल रहा है और उनकी हालत स्थिर बताई गई है।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फोन कर शरद पवार का हालचाल जाना था और उन्हें आराम करने की सलाह दी थी। शरद पवार के करीबी विट्ठल मणियार के मुताबिक, बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री ने सुप्रिया सुले की राष्ट्रीय जिम्मेदारियां संभालने की क्षमता का भी जिक्र किया था।

फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में NCP के दोनों गुटों के बीच संभावित सुलह को लेकर चर्चाएं जारी हैं। प्रफुल्ल पटेल और शरद पवार की मुलाकात के बाद इस मुद्दे पर निगाहें अब 10 नवंबर के बाद होने वाली संभावित बातचीत पर टिकी हैं। हालांकि, विलय होगा या नहीं और इसके लिए दोनों पक्ष किन शर्तों पर सहमत होंगे, यह अभी साफ नहीं है।

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