सूखा राहत और कर्जमाफी की मांग पर 12 हजार से ज्यादा किसानों का मुंबई कूच, 1,000 से अधिक वाहनों के साथ अकोले से निकला लॉन्ग मार्च

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किसानों का मुंबई कूच: अकोले से वर्षा बंगले तक लॉन्ग मार्च, मांगें क्या हैं

महाराष्ट्र के किसानों, खेत मजदूरों और ग्रामीण कामगारों की मांगों को लेकर अखिल भारतीय किसान सभा के नेतृत्व में सोमवार को अकोले से मुंबई के लिए वाहन लॉन्ग मार्च शुरू हुआ। किसान सभा के मुताबिक, राज्य के 20 से अधिक जिलों से आए 12,000 से ज्यादा लोग 1,000 से अधिक वाहनों में सवार होकर मुंबई की ओर रवाना हुए हैं। आंदोलनकारियों की योजना मुख्यमंत्री के सरकारी आवास वर्षा बंगले तक पहुंचकर अपनी मांगें सरकार के सामने रखने की है।

मार्च की शुरुआत और अब तक का रूट

रवानगी से पहले अकोले शहर में लाल झंडों के साथ पैदल मार्च निकाला गया। इसमें किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अशोक धवले, राष्ट्रीय महासचिव डॉ. विजू कृष्णन, राष्ट्रीय सहसचिव डॉ. अजित नवले, माकपा विधायक विनोद निकोले और संगठन के अन्य पदाधिकारी शामिल हुए। नासिक जिले से आया वाहनों का काफिला घोटी में मुख्य मार्च से जुड़ गया।

आयोजकों के अनुसार, सोमवार रात मार्च का पड़ाव इगतपुरी के पास घाटणदेवी में था। योजना के मुताबिक मंगलवार सुबह आंदोलनकारी कसारा घाट होते हुए मुंबई की ओर बढ़ेंगे।

किसानों की प्रमुख मांगें क्या हैं?

मार्च की सबसे बड़ी वजह सूखा है। राज्य सरकार ने 14 अक्तूबर को कैबिनेट बैठक के बाद सूखा प्रभावित तालुकों की संख्या 265 से बढ़ाकर 305 कर दी थी। महाराष्ट्र में कुल 358 तालुके हैं, यानी 85 प्रतिशत से ज्यादा क्षेत्र सूखा प्रभावित घोषित हो चुका है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन तालुकों में सूखा राहत की 12 मानक रियायतें लागू करने और दिवाली से पहले हर किसान के खाते में 5,000 रुपये की अग्रिम सहायता जमा करने की घोषणा की थी।

किसान सभा इस सहायता को अपर्याप्त बताती है। संगठन की मांगें इस प्रकार हैं:

  • फसल नुकसान का पर्याप्त मुआवजा दिया जाए और फसल बीमा के भुगतान में आ रही बाधाएं दूर की जाएं।
  • दो लाख रुपये की कर्जमाफी का लाभ नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों को भी मिले।
  • वन भूमि, देवस्थान ट्रस्ट, इनाम और चरागाह की जमीन पर खेती करने वाले किसानों के भूमि अधिकार दर्ज किए जाएं।
  • नमो शेतकरी महासम्मान निधि योजना की दो लंबित किस्तें किसानों के खातों में डाली जाएं।

आशा, आंगनवाड़ी और निर्माण मजदूर भी शामिल

यह आंदोलन सिर्फ किसानों तक सीमित नहीं है। मार्च में पेसा कर्मचारी, निर्माण मजदूर, पोषण आहार कर्मचारी, आशा कार्यकर्ता और आंगनवाड़ी कर्मचारी भी शामिल हैं। किसान सभा ने ग्रामीण मजदूरों के लिए उचित वेतन, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा सरकारी योजनाओं के कर्मचारियों की लंबित मांगें हल करने की मांग रखी है।

संगठन की एक और मांग लाडकी बहिण योजना से जुड़ी है। किसान सभा का दावा है कि ई-केवाईसी की वजह से योजना से बाहर हुईं 81 लाख महिलाओं को दोबारा शामिल कर उनका बकाया मानधन दिया जाए और ई-केवाईसी प्रक्रिया फिर शुरू की जाए। इस साल ई-केवाईसी के बाद लाभार्थियों की संख्या घटने को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं, जो करीब 67 लाख से 86 लाख महिलाओं के बीच हैं।

कर्जमाफी पर क्या है सरकार की योजना?

राज्य सरकार मार्च में पेश बजट में दो लाख रुपये तक की फसल कर्जमाफी की घोषणा कर चुकी है। जून में कैबिनेट ने करीब 36,585 करोड़ रुपये की इस योजना को मंजूरी दी, जिससे लगभग 56 लाख किसानों को फायदा होने का अनुमान है। योजना उन किसानों के लिए है जिनके फसल ऋण 30 सितंबर 2025 तक बकाया थे। नियमित रूप से कर्ज चुकाने वाले किसानों के लिए बजट में 50,000 रुपये के प्रोत्साहन की घोषणा की गई थी। किसान सभा की मांग इसी अंतर को पाटने की है।

किसान सभा का आरोप: नोटिस दिए गए, बातचीत नहीं हुई

किसान सभा के अनुसार, मांगों को लेकर 21 से 26 अक्तूबर तक अकोले में महा-मुक्काम सत्याग्रह किया गया। संगठन का आरोप है कि सरकार ने सकारात्मक चर्चा करने के बजाय आंदोलनकारियों को पुलिस के जरिये नोटिस भिजवाए और उन्हें वर्षा बंगले तक जाने से रोकने की कोशिश की। संगठन का कहना है कि लोकतांत्रिक तरीके से मांगें रखना जनता का अधिकार है और नोटिस से किसानों की समस्याएं खत्म नहीं होंगी। इस आरोप पर सरकार या पुलिस की ओर से सार्वजनिक प्रतिक्रिया हमारी जानकारी में नहीं आई है।

आगे क्या?

किसान सभा ने मुख्यमंत्री से प्रतिनिधिमंडल के साथ चर्चा कर सभी मांगों पर ठोस निर्णय लेने और उन्हें लिखित रूप में स्वीकार करने की अपील की है। संगठन ने साफ किया है कि मांगें लिखित रूप में मंजूर होने तक आंदोलन जारी रहेगा।

पहले भी निकल चुके हैं ऐसे मार्च

किसान सभा के नेतृत्व में मुंबई की ओर यह पहला कूच नहीं है। मार्च 2018 में नासिक से मुंबई तक करीब 180 किलोमीटर की पदयात्रा निकली थी, जिसमें आयोजकों के अनुमान के मुताबिक मुंबई पहुंचते-पहुंचते 40,000 से ज्यादा किसान जुड़ गए थे। मार्च 2023 में नासिक से शुरू हुआ मार्च सरकार से बातचीत के बाद खत्म हुआ। इस साल जनवरी में भी नासिक जिले के दिंडोरी से मुंबई के लिए लॉन्ग मार्च निकला था, जिसके दौरान सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को चर्चा के लिए बुलाया था। इस बार का मार्च वाहनों से हो रहा है।

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