बरेली का 300 बेड अस्पताल पीपीपी मॉडल पर चलेगा, शासन के आदेश का इंतजार; 2013 में शुरू हुआ था निर्माण

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बरेली 300 बेड अस्पताल पीपीपी मॉडल पर चलेगा, शासन के आदेश का इंतजार

बरेली के 300 बेड अस्पताल का संचालन अब सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर होगा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) डॉ. विश्राम सिंह के अनुसार, शासन से आदेश मिलते ही स्थानीय स्तर पर व्यवस्थाएं शुरू कर दी जाएंगी। स्वास्थ्य विभाग को उम्मीद है कि इससे जिला अस्पताल पर मरीजों का दबाव घटेगा और भर्ती, आपातकालीन उपचार तथा विशेषज्ञ सेवाओं का दायरा बढ़ सकेगा। रिपोर्टों में पीपीपी मोड पर संचालन को कैबिनेट की मंजूरी मिलने का उल्लेख है।

क्या बदलेगा

अस्पताल अब तक पूरी क्षमता से भर्ती (आईपीडी) सेवा शुरू नहीं कर सका है। पीपीपी मॉडल में निजी भागीदार के सहयोग से अस्पताल का संचालन किया जाएगा। अफसरों के अनुसार, इसका मकसद इसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में विकसित करना है। भागीदार का चयन किन शर्तों पर होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। अस्पताल परिसर में सीएमओ कार्यालय का नया भवन भी बन रहा है, ताकि जिला अस्पताल परिसर के पुराने भवन से कार्यालय यहां शिफ्ट हो सके।

कितना लंबा रहा इंतजार

अस्पताल का निर्माण मार्च 2013 में शुरू हुआ। रिपोर्टों के अनुसार इस पर करीब 69 करोड़ रुपये खर्च हुए, लेकिन निर्माण पूरा होने का वर्ष 2016 और 2018 अलग-अलग बताया गया है। कोविड काल में इसे कोविड अस्पताल के रूप में इस्तेमाल किया गया। तत्कालीन कमिश्नर संयुक्ता समद्दार ने बाद में यहां औपचारिक ओपीडी चलाने का आदेश दिया। रिपोर्टों के मुताबिक, दिसंबर 2022 के बाद शासन ने आईपीडी के लिए करीब 8.33 करोड़ रुपये का बजट भेजा, जिससे बेड, आईसीयू बेड और अन्य उपकरण खरीदे गए। मगर डॉक्टर और स्टाफ की तैनाती न होने से आईपीडी शुरू नहीं हो सकी।

अभी क्या सेवाएं मिलती हैं

रिपोर्टों के अनुसार, अस्पताल में ओपीडी सुबह आठ से दोपहर दो बजे तक चलती है। फिजिशियन, नेत्र रोग, दंत रोग और त्वचा रोग विशेषज्ञ सेवाएं देते हैं। इसके अलावा सीटी स्कैन, मॉडल रैबीज सेंटर और टीबी क्लीनिक भी चल रहे हैं। शुरुआत में जनरल सर्जन की तैनाती भी हुई थी। परिसर में करीब 42 करोड़ रुपये के बजट से ट्रॉमा सेंटर बनाने की बात भी कही गई थी।

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद बढ़ी कवायद

एक अप्रैल 2025 को बरेली में समीक्षा बैठक के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 300 बेड अस्पताल और मानसिक चिकित्सालय की खाली जमीन को मिलाकर सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल का प्रस्ताव शासन को भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद पीपीपी मॉडल पर संचालन के लिए कमिश्नरी स्तर पर चर्चा हुई और इंडियन मेडिकल एसोसिएशन से भी प्रस्ताव मांगा गया था। शासन स्तर की टीम ने भी अस्पताल के निरीक्षण की तैयारी की थी।

आगे क्या

अब शासन का औपचारिक आदेश आना बाकी है। उसके बाद ही पीपीपी भागीदार के चयन और संचालन की समय-सीमा तय होगी। सीएमओ ने कहा है कि आदेश आते ही स्थानीय स्तर की व्यवस्थाएं की जाएंगी।

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