आगरा के फाउंड्री नगर और सिकंदरा औद्योगिक क्षेत्र के उद्यमियों ने बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) उनसे 35 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखरखाव शुल्क वसूल रहा है, जबकि स्ट्रीट लाइट खराब हैं, नियमित सफाई नहीं होती, पीने के मीठे पानी की व्यवस्था नहीं है और करीब एक महीने से धंसी एक सड़क की मरम्मत नहीं हुई है। यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक ने कहा है कि सड़क की मरम्मत के निर्देश दिए जा चुके हैं और पानी के लिए टंकी बन रही है।
कहां-कहां है औद्योगिक क्षेत्र
फाउंड्री नगर में करीब 400 औद्योगिक भूखंड हैं। इसके अलावा सिकंदरा में साइट ए, बी और सी के रूप में औद्योगिक क्षेत्र है। उद्यमियों के संगठन दोनों इलाकों में सुविधाओं की कमी की बात उठा रहे हैं।
उद्यमियों की शिकायतें
फाउंड्री नगर उद्योग संघ के अध्यक्ष अतुल गुप्ता के अनुसार क्षेत्र में पीने के पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, कचरे और कूड़े की सफाई नहीं होती और रात में इलाके में अंधेरा रहता है। उन्होंने बताया कि एक महीने पहले एक सड़क धंस गई थी, जिसकी अब तक मरम्मत नहीं कराई गई। उद्यमी संजय गोयल ने आरोप लगाया कि यूपीसीडा केवल शुल्क वसूल रहा है, जबकि सुविधाएं नहीं मिल रहीं।
शुल्क के आधार पर भी सवाल
नेशनल चैंबर के अध्यक्ष मनोज कुमार बंसल ने शुल्क की गणना पर आपत्ति जताई। उनके मुताबिक यूपीसीडा के रखरखाव शुल्क के अलावा उद्यमियों को जलकल, जलमूल्य और सीवर कर भी अलग से देना पड़ रहा है।
बंसल ने बताया कि क्षेत्र जब नगर निगम के अधीन था, तब आवासीय भूखंड की दर की तुलना में औद्योगिक भूखंड पर तीन गुना और व्यावसायिक पर पांच गुना कर का प्रावधान था, और यह केवल निर्मित (कवर्ड) क्षेत्र पर लगता था। उनका कहना है कि अब कई भूखंड 2,000 वर्ग मीटर के हैं और किसी भूखंड पर केवल 500 वर्ग मीटर निर्माण होने के बावजूद पूरे 2,000 वर्ग मीटर के हिसाब से शुल्क वसूला जा रहा है। इसे लेकर उद्यमियों में रोष है।
यूपीसीडा का पक्ष
यूपीसीडा के क्षेत्रीय प्रबंधक सीके मौर्य ने बताया कि धंसी सड़क की मरम्मत के लिए अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) को निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि पानी के लिए टंकी का निर्माण हो रहा है और औद्योगिक क्षेत्रों में सुविधाएं पहले की तुलना में बेहतर हुई हैं। उनके अनुसार उद्यमियों के सहयोग से सभी समस्याओं का समाधान कराया जाएगा।
आगे क्या
उद्यमियों की मांग मूल रूप से यह है कि जिन सुविधाओं के नाम पर शुल्क लिया जा रहा है, वे जमीन पर दिखें और शुल्क की गणना का आधार स्पष्ट किया जाए। सड़क मरम्मत और पानी की टंकी का काम कब तक पूरा होगा, इसकी समय-सीमा अभी सामने नहीं आई है।

