दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की बहन श्वेता सिंह कीर्ति ने एक वीडियो संदेश में भाई के पोस्टमार्टम को लेकर नए दावे किए हैं। श्वेता के मुताबिक, हाल ही में उन्हें उस व्यक्ति से जुड़ी जानकारी मिली, जिसने कथित तौर पर सुशांत का पोस्टमार्टम किया था। उन्होंने कहा कि बताया गया कि सुशांत के शरीर पर बहुत बल प्रयोग हुआ, उनका पैर टूटा था और आंखों पर चोट थी। इन दावों की स्वतंत्र या आधिकारिक पुष्टि अभी सामने नहीं आई है, और न ही किसी जांच एजेंसी या अस्पताल का नया बयान आया है।
श्वेता ने क्या कहा
श्वेता के वीडियो के हवाले से छपी रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि पोस्टमार्टम करने वाले व्यक्ति ने बंदूक या किसी हथियार के इस्तेमाल की बात बताई। हालांकि इस बिंदु पर रिपोर्टों में फर्क है। कुछ रिपोर्टों में सिर्फ गन या बंदूक का जिक्र है, जबकि एक रिपोर्ट में गर्दन के पास स्टन गन के इस्तेमाल का उल्लेख है। श्वेता ने उस व्यक्ति का नाम नहीं बताया, और यह बात उनके सुने हुए दावे के रूप में सामने आई है, किसी दस्तावेज या रिपोर्ट के आधार पर नहीं।
वीडियो में श्वेता का संदेश भावनात्मक रहा। उन्होंने कहा कि किसी अपने के साथ ऐसा होने पर माफ करने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए, लेकिन वह नफरत, बदले या नाराजगी में नहीं डूबना चाहतीं। उन्होंने समर्थकों से अपील की कि वे ईश्वर और अच्छाई से भरोसा न खोएं और अपने मन में नकारात्मकता को जगह न दें।
आधिकारिक स्थिति क्या है
सुशांत 14 जून 2020 को मुंबई के अपने घर में मृत पाए गए थे। मुंबई पुलिस ने शुरुआत में इसे आत्महत्या के तौर पर दर्ज किया था। मामला बाद में सीबीआई के पास गया। रिपोर्टों के अनुसार एम्स के डॉक्टरों के पैनल ने अक्टूबर 2020 में विसरा और ऑटोप्सी रिपोर्ट की जांच के बाद कुछ संदिग्ध नहीं पाया और आत्महत्या की संभावना बताई। मार्च 2025 में सीबीआई ने दो मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की, जिनमें हत्या के सबूत न मिलने और किसी आपराधिक साजिश के संकेत न होने की बात कही गई। सुशांत का परिवार इस क्लोजर रिपोर्ट से असंतुष्ट रहा और उसे अदालत में चुनौती देने की बात कह चुका है। श्वेता पहले भी भाई की मौत पर सवाल उठाती रही हैं।
दिशा सालियान मामला
सुशांत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की जून 2020 में मुंबई में मौत हुई थी। उनके पिता सतीश सालियान की याचिका पर बॉम्बे हाई कोर्ट ने सीबीआई को एफआईआर दर्ज कर जांच करने का निर्देश दिया। रिपोर्टों के अनुसार यह आदेश 2 सितंबर 2026 को आया और सीबीआई ने बाद में एफआईआर दर्ज की। अदालत ने स्पष्ट किया कि एफआईआर दर्ज होना किसी को दोषी ठहराना नहीं है। दोनों मामले अलग हैं और उनके बीच किसी संबंध की कोई पुष्टि नहीं हुई है।
आगे क्या
श्वेता के ताजा दावे तब तक असत्यापित हैं, जब तक कोई आधिकारिक दस्तावेज, बयान या अदालत के सामने पेश साक्ष्य सामने नहीं आता। इसलिए उन्हें स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।

