यूपी मानवाधिकार आयोग में तैनाती पर सवाल: पूर्व डीजी और अफसरों पर नियम अनदेखी व वित्तीय अनियमितता के आरोप, शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट

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यूपी मानवाधिकार आयोग में तैनाती पर सवाल: पूर्व डीजी और अफसरों पर नियम अनदेखी व वित्तीय अनियमितता के आरोप, शासन ने मांगी जांच रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग के अनुसंधान दल में अफसरों और कर्मचारियों की तैनाती को लेकर एक शिकायत के बाद शासन ने जांच के आदेश दिए हैं। आयोग में तैनात रहे एक पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजी) और उनके अधीनस्थ अधिकारियों पर तैनाती व संबद्धता से जुड़े नियमों की अनदेखी करने के साथ-साथ वित्तीय अनियमितता के भी आरोप लगाए गए हैं। शासन के गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए आयोग के सचिव को पत्र भेजकर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए आख्या मांगी है।

यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि ये फिलहाल आरोप हैं, जिनकी जांच शासन के निर्देश पर आयोग स्तर पर होनी है। किसी अधिकारी के खिलाफ अब तक कोई दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

कौन हैं शिकायतकर्ता, क्या है दावा

शिकायत लखनऊ निवासी शीतांशु पटेल की ओर से की गई है, जो खुद आयोग के अनुसंधान दल में कार्यरत रह चुके हैं और इसी साल इंस्पेक्टर पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। उन्होंने शासन को भेजी शिकायत में दावा किया है कि मानवाधिकार आयोग और अन्य अल्पकालिक इकाइयों में प्रतिनियुक्ति व संबद्धता की सामान्य अवधि तीन वर्ष निर्धारित है, जिसे विशेष अर्हता की स्थिति में विभागाध्यक्ष की अनुशंसा पर अधिकतम एक वर्ष और बढ़ाया जा सकता है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि इसके बावजूद आयोग में कई पुलिसकर्मियों को 11 से 13 साल तक संबद्ध रखा गया, जो तय नियमों से कहीं अधिक है।

कई जिलों से भेजे गए कर्मियों का ब्योरा शिकायत में शामिल

शिकायत के साथ पुलिस मुख्यालय और शासन के अलग-अलग समय पर जारी आदेशों की प्रतियां भी संलग्न की गई हैं। इनमें वर्ष 2008, 2013, 2015, 2019 और 2023 में बहराइच, प्रतापगढ़, अयोध्या और लखनऊ समेत अन्य स्थानों से उपनिरीक्षकों व आरक्षियों के स्थानांतरण या संबद्धता से जुड़े आदेश शामिल बताए गए हैं। शिकायतकर्ता ने संबंधित पुलिसकर्मियों की आयोग में तैनाती की अवधि का ब्योरा देते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की है।

पृष्ठभूमि: कैसी होती है आयोग की अनुसंधान इकाई

उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग की अनुसंधान इकाई की अगुवाई सामान्यतः पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) रैंक का अधिकारी करता है, जिसके अधीन एक अपर पुलिस अधीक्षक, दो निरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी काम करते हैं। यह टीम आयोग में आने वाली शिकायतों की जांच-पड़ताल में सहयोग करती है। शिकायत में उठाया गया मुद्दा इसी इकाई में तैनाती और संबद्धता की समयसीमा को लेकर है।

जांच आदेश के बावजूद कार्रवाई सुस्त, शिकायतकर्ता का आरोप

गृह (मानव अधिकार) अनुभाग-2 के उप सचिव अजीत कुमार सिन्हा ने आयोग के सचिव को शिकायत के बिंदुओं पर नियमानुसार कार्रवाई करते हुए शासन को आख्या भेजने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह देखा जाना है कि लंबी अवधि की संबद्धता किस आदेश और किस सक्षम अधिकारी की अनुमति से की गई, और क्या इसमें तय नियमों का पालन हुआ या नहीं।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि जांच के आदेश दिए जाने के लंबे समय बाद भी अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है और मामला फाइलों में ही दबा हुआ है। हालांकि, इस दावे की आयोग या शासन की ओर से स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। मामले पर आयोग या संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आई है।

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