मौत के एक महीने बाद बनवाई गई बीमा पॉलिसी, नॉमिनी ने उठाया 10.78 लाख का क्लेम, सात के खिलाफ FIR

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मौत के एक महीने बाद बनवाई गई बीमा पॉलिसी, नॉमिनी ने उठाया 10.78 लाख का क्लेम, सात के खिलाफ FIR

उत्तर प्रदेश के एटा जिले के जलेसर क्षेत्र में बीमा फर्जीवाड़े का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें एक महिला की मौत के करीब एक महीने बाद उसके नाम पर बीमा पॉलिसी जारी करवाई गई और बाद में नॉमिनी ने 10.78 लाख रुपये का क्लेम भी हासिल कर लिया। मामला सामने आने के बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधि ने जलेसर थाने में प्रस्तावक, नामांकित व्यक्ति (नॉमिनी) सहित सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

कैसे हुआ खुलासा

पुलिस के मुताबिक, जलेसर के बड़े मियां दरवाजा रोड निवासी अनीता देवी के नाम से 22 अक्तूबर 2024 को बंधन लाइफ इंश्योरेंस की ओर से 10 लाख 78 हजार 245 रुपये की बीमित राशि वाली जीवन बीमा पॉलिसी जारी की गई थी। पॉलिसी जारी करते समय उन्हें पूरी तरह स्वस्थ बताया गया था और किसी बीमारी, इलाज, अस्पताल में भर्ती होने या नियमित दवा लेने की जानकारी नहीं दी गई थी।

मृत्यु दावा प्राप्त होने पर बीमा कंपनी ने एक निजी जांच एजेंसी से सत्यापन कराया। एजेंसी ने 30 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट में बताया कि अनीता देवी की मृत्यु 30 नवंबर 2024 को बीमारी के चलते घर पर हुई थी। इसी रिपोर्ट के आधार पर बीमा कंपनी ने नॉमिनी को 10.78 लाख रुपये की राशि का भुगतान कर दिया।

दावा राशि जारी होने के बाद सामने आई असलियत

बीमा कंपनी के प्रतिनिधि गौरव रावत के मुताबिक, क्लेम का भुगतान होने के कुछ समय बाद कंपनी को अनीता देवी की मृत्यु 20 सितंबर 2024 को होने से जुड़ी एक समाचार-पत्र की कटिंग समेत नए दस्तावेज मिले। इससे स्पष्ट हुआ कि पॉलिसी जारी होने से करीब एक महीने पहले ही अनीता देवी का निधन हो चुका था। जांच में यह भी सामने आया कि अनीता देवी मृत्यु से तीन-चार महीने पहले से अत्यधिक मासिक रक्तस्राव की समस्या से पीड़ित थीं और उनका इलाज जलेसर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र तथा एक नर्सिंग होम में भी कराया गया था, हालांकि उस इलाज से जुड़ा कोई रिकॉर्ड जांच में नहीं मिल सका।

कई लोगों की भूमिका जांच के दायरे में

बीमा कंपनी ने अपनी तहरीर में प्रस्तावक, नामांकित व्यक्ति, बीमा एजेंट या मध्यस्थ तथा पॉलिसी जारी करने व दस्तावेज सत्यापन से जुड़े लोगों की भूमिका को संदिग्ध बताया है। हालांकि प्राथमिकी में अभी तक किसी का नाम उजागर नहीं किया गया है और जांच जारी रहने तक किसी की भूमिका को स्थापित तथ्य नहीं माना जा सकता। कंपनी ने पुलिस से मृत्यु प्रमाण-पत्र, निकाय अभिलेख, अस्पताल रिकॉर्ड, बीमा प्रस्ताव, केवाईसी दस्तावेज, बैंक लेन-देन, कॉल डिटेल और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच कराने का अनुरोध किया है।

जलेसर सीओ ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बीमा कंपनी के प्रतिनिधि की तहरीर पर प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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